महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक जबरदस्त कदम उठाया है। “मुख्यमंत्री-माझी लाडकी बहीण योजना” के तहत अब राज्य की विवाहित, विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में ₹1,900 की सहायता राशि दी जाएगी। 4 अगस्त 2025 को महिला व बाल विकास विभाग की ओर से इसका आदेश जारी किया गया है।
महिलाओं के लिए आई बड़ी खुशखबरी – सीधे खाते में मिलेगा ₹1,900
राज्य सरकार का यह फैसला महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत जिन महिलाओं की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच है और जो निम्नलिखित श्रेणियों में आती हैं – विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, निराश्रित – उन्हें यह लाभ दिया जाएगा। शर्त बस इतनी है कि महिला का आधार कार्ड उसके स्वयं के नाम पर होना चाहिए और वह बैंक खाते से जुड़ा होना चाहिए। यह राशि सीधे Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को बिना किसी बिचौलिए के सीधा लाभ देना है।
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जानिए कितनी राशि और कहां से आएगा फंड
इस योजना के लिए आर्थिक वर्ष 2025–26 में सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग द्वारा ₹450 करोड़ की बजट व्यवस्था की गई है। इस रकम को BEAMS प्रणाली के तहत वितरित किया जाएगा। ₹450 करोड़ में से ₹386.10 करोड़ की राशि को वेतनतर मद से और शेष ₹63.90 करोड़ की राशि BEAMS प्रणाली से उपलब्ध कराई गई है। यह राशि उन सभी पात्र महिलाओं को वितरित की जाएगी जो राज्य सरकार द्वारा तय मानदंडों को पूरा करती हैं और जिनका पंजीकरण सही तरीके से हुआ है।
किसे मिलेगा योजना का लाभ? पात्रता और जरूरी दस्तावेज
मुख्यमंत्री-माझी लाडकी बहीण योजना का लाभ पाने के लिए महिला को महाराष्ट्र की निवासी होना जरूरी है। साथ ही, निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं:
- उम्र: 21 वर्ष से 60 वर्ष तक
- स्थिति: विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, या निराश्रित महिला
- बैंक खाता: स्वयं के नाम से आधार-लिंक्ड बैंक खाता अनिवार्य
- नवबौध्द घटकांतील महिलाएं भी पात्र होंगी

महिला को योजना के लिए पंजीकरण कराना होगा और आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक, विवाह प्रमाणपत्र (यदि हो), या अन्य आवश्यक दस्तावेजों की कॉपी देनी होगी।
योजना का उद्देश्य क्या है और इसके पीछे सरकार की सोच क्या है?
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि महिलाओं को केवल सामाजिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत किया जाना चाहिए। यही वजह है कि यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए महिलाओं को अपने घर-परिवार में निर्णय लेने की भूमिका में सशक्त बनाया जाएगा। राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लाखों महिलाएं हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में पिछड़ जाती हैं। यह योजना उनके लिए एक उम्मीद की किरण बन सकती है। ₹1,900 की यह राशि महिला के हाथ में सीधे पहुंचेगी, जिससे वह अपने जरूरी खर्च या स्वास्थ्य से जुड़े ज़रूरी कार्यों के लिए स्वतंत्र निर्णय ले सकेगी।
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योजना कैसे काम करेगी? फंड का वितरण और निगरानी
इस योजना का क्रियान्वयन महिला व बाल विकास विभाग द्वारा किया जाएगा, लेकिन फंड सामाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। फंड का वितरण DBT के माध्यम से होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए सॉफ्टवेयर सिस्टम और BEAMS (Budget Estimation, Allocation & Monitoring System) के ज़रिए फंड ट्रैकिंग, वितरण और उपयोग की निगरानी की जाएगी। इसका अर्थ है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना कम हो जाती है और हर लाभार्थी महिला को सही समय पर राशि का भुगतान मिल सकेगा।
आगे क्या? और किन योजनाओं से जुड़ेगी यह स्कीम
सरकार इस योजना को राज्य की अन्य योजनाओं जैसे “सावित्रीबाई फुले शिक्षण योजना”, “उज्ज्वला योजना”, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान” आदि से लिंक कर सकती है। आगे चलकर यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार, स्वास्थ्य बीमा, पोषण योजनाओं और डिजिटल साक्षरता से जोड़ने का माध्यम बन सकती है।
लाडकी बहीण” योजना सिर्फ योजना नहीं, बदलाव की शुरुआत है!
राज्य सरकार की यह योजना महिलाओं को सिर्फ ₹1,900 की आर्थिक मदद नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीने का हक भी देती है। महिलाओं को घर के फैसलों में भागीदार बनाना, उनकी सेहत और जरूरतों को प्राथमिकता देना – यही इस योजना का असली मकसद है। अगर आप या आपके परिवार की कोई महिला इस योजना की पात्रता रखती है, तो जल्द ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करें और इस लाभ का हिस्सा बनें।
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